Shani Gochar 2023 (शनि गोचर राशिफल २०२३)
- 09-12-2022
- By : Team Astrologer.Click
कुम्भ राशि आप की राशि से शनि ग्रह की स्थिति वर्ष 2023 में प्रथम स्थान में रहेगी। यह वर्ष आप के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हो सकता है, पेट, अपच और गैस आदि की {…}
Read Moreकुम्भ राशि आप की राशि से शनि ग्रह की स्थिति वर्ष 2023 में प्रथम स्थान में रहेगी। यह वर्ष आप के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हो सकता है, पेट, अपच और गैस आदि की {…}
Read Moreज्योतिष शास्त्र में मंगल को सेनापति कहा गया है। शूरवीरता, साहस, हिम्मत, लड़ाई झगड़ा, धोखाधड़ी, चोरी, भाई, मित्र, चाचा, आदि की जानकारी मंगल से मिलती है। सूर्य तथा बृहस्पति मंगल के मित्र हैं और {…}
Read Moreकुत्ते का शकुन :- यात्रा के समय यदि कुत्ता अपने मुंह में हाड-़ माँस रोटी अथवा अन्य किसी आहार को लिये हुए सामने दिखाई दे तो यात्रा सफल होती है तथा पथिक की मनोकामना {…}
Read Moreमनुष्य व प्राणीमात्र जब इस सांसारिक वातावरण में जन्म लेता है, तब इस भौतिक देह धारी शरीर में पंचतत्व का भी उसी समय प्रवेश हो जाता है, देह तब तक ही सजीव कहलाती है, {…}
Read Moreसंतान प्राप्ति योग :- लग्नेश, सप्तमेश, पंचमेश व गुरू पंचम भाव को देखते हां तो इन ग्रहों की दशांतर्दशा में पुत्र प्राप्ति का योग बनता है। जब गोचर काल में लग्न का पति पंचमेश {…}
Read Moreकिसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य के लिए देव पूजा में साधक द्वारा सामग्री के साथ-साथ अन्य कई वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। जैसे जल, पुष्प, दीपक, घंटी, शंख, आसन, कलश आदि, जिनका {…}
Read Moreभारतीय मान्यताओं के अनुसार उत्तर, पूर्व, पश्चिम व दक्षिण दिशाओं को माना जाता है। वास्तुकोण और कुछ नहीं वरन इन्हीं दो दिशाओं के मिलन स्थान को कहा जाता है। उदाहरणार्थ उत्तर तथा पूर्व दिशाओं {…}
Read More1. रविवार :- रविवार के दिन जन्म लेने वाले बालक की प्रकृति तेज होती है। यह चतुर, दान करने वाला तथा प्रेमी होता है। पित्त की बीमारी के रोग इसे लगते हैं। इसे 1, {…}
Read Moreसुहृद् गृह ग्राम चतुष्पदानां श्रेत्रोद्यमालोकनकं चतुर्थे।‘जातकाभरमण्’ का मत है कि मित्र, बन्धु, पशु और कृषि कर्म का विचार चतुर्थ भाव से करना चाहिये। ‘भावकुतूहलम्’ ग्रन्थ के अनुसार-सुखपतिः सुखगस्तनुनाथं युग जन यति प्रवरालमगिंनाम्। त्रिकगतोविरीतमिहादिभिः सुख {…}
Read Moreभारतीय संस्कृति में सरस्वती पूजन का महत्व क्या है?- इसे जानने से पूर्व हमें यह जानना आवश्यक है कि भगवती सरस्वती का स्वरूप या प्रभाव क्या है? भगवती सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान व वांणी {…}
Read Moreनमस्ते ब्रह्मविद्ये में, हृदब्जष्यूतमे श्यामे।शरण्ये नन्दनोऽहं ते सदाशिव आविरेधि द्राक्।।1।। शरणार्थी को शरण देनेवाली मेरे हृदयकमल स्वामिनी हे ब्रह्मविद्ये! हे श्यामे! श्री उमे! मैं तेरा नन्दन सदाशिव हूँ। तू तुरन्त प्रकट हो जा। कियन्ते {…}
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