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चोली-दामन का सम्बंध है, ज्योतिष और आयुर्वेद में

यह सर्वविदित है कि वेद के षडंगों में ज्योतिष वेद के निर्मल चक्षु हैं। मानव के सर्वागों में चक्षु बहुमूल्य एवं मुख्य हैं, क्योंकि बिना चक्षुओं के मनुष्य अकिंचन है। इसीलिये लिखा है संयुक्तों {…}

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विवाह संस्कार में गोधूलि मुहूर्त

समस्त शुभाशुभ कार्यो के सम्यक् प्रतिपादन हेतु ज्योतिष शास्त्र में शुद्ध मुहुर्त की महत्ता को स्वीकार किया गया है। शुद्ध मुहूर्त होने से वर्ष, मास, दिन अथवा लग्न आदि के समस्त दोषों का परिहार {…}

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स्वप्न और उनका फल

मानव-जीवन में स्पप्नों का विशेष महत्व रहता है। स्वप्न देखने वाला प्रायः अपने द्वारा देखे गये स्वप्नों का शुभाशुभ फल जानने की प्रायः चेष्टा करता है। तथा (बड़े-बूढ़ों से) देखे गये स्वप्न के विषय {…}

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कौन हैं 8 चिरंजीवी

अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि। इन आठों चिरंजीवीयों की जो मनुष्य प्रातःकाल श्रद्धापूर्वक स्तुति करता है, वह सब रोगों से मुक्त होकर सुखपूर्वक सौ वर्ष की आयु को प्राप्त {…}

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परमात्मा की शरण में परमगति

चौरासी लाख योनियों में से सिवा मनुष्य के किसी को भी अपने जीवन के उद्देश्य का पता नहीं है। मनुष्य और पशु समान रूप से आहार, निद्रा, भय और मैथुन में प्रवृत्त होते हैं। {…}

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वास्तु शास्त्र और फेंगशुई

इन दिनों भारत के छोटे-बड़े कस्बे से लेकर महानगरों के शॉपिंग मॉल फेंगशुई के आट्रिकल से भरे पड़े हैं। आज हर वर्ग का व्यक्ति फेंगशुई के टोटकों से अपनी किस्मत को चमकाने के लिये {…}

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दीवानों की दुनियां

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी। यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्चतो मुनेः।।भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि- ‘जो सब भूतप्राणियों के लिये रात्रि है, संयमी पुरुष उसमें जागता है, और सब भूतप्राणी जिसमें {…}

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ज्ञान की साधना

निष्काम साधना, भक्ति साधना और योग साधना की तरह एक और साधना है- ज्ञान की साधना! इस ज्ञान की साधना की पद्धति श्रुति इस प्रकार बतलाती है- आत्मज्ञान का दर्शन करना चाहिये। दर्शन करने {…}

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कुंडली के लग्न से देखें शरीर की आकृति

‘‘क्षिति जल पावक गगन समीरा,पंचतत्व रचित यह अधम शरीरा।’’प्राचीन काल से ही भारतवर्ष के महर्षियों का यह विश्वास रहा है कि मनुष्य का शरीर पांच महातत्वों से बना है। यह तत्व हैं- पृथ्वी, जल, {…}

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वर्ण-संकर ग्रह केतु

ज्यौतिष शास्त्र में रवि, चन्द्र, मंगल आदि सात ग्रहों को मुख्य स्थान दिया गया है एवं राहू-केतु को छाया ग्रह के रूप में माना है। मगर हमारे विचार में सात ग्रहों से भी कहीं {…}

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