
‘‘क्षिति जल पावक गगन समीरा,
पंचतत्व रचित यह अधम शरीरा।’’
प्राचीन काल से ही भारतवर्ष के महर्षियों का यह विश्वास रहा है कि मनुष्य का शरीर पांच महातत्वों से बना है। यह तत्व हैं- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश।
पृथ्वी तत्व से शरीर में अस्थि आदि की बनावट कही जाती है और जल तत्व शरीर की स्थूलता का सूचक है। ज्योतिष के कुछ नियमों की ओर ध्यान देने से हम कुंडली को केवल देख कर ही शरीर के गठनादि का बोध कर सकते हैं।
1. हर ग्रह का अपना-अपना तत्व है। जैसे बुध को पृथ्वी तत्व का सूचक माना जाता है, इसी प्रकार हर ग्रह की अपनी-अपनी प्रकृति भी है जैसे सूर्य शुष्क (रूखा) ग्रह है तो बृहस्पति जल ग्रह है। ग्रहों की यह दोनों संज्ञायें नीचे एकत्रित की गई हैं। इन संज्ञाओं को सामने रखते हुये जातक के शरीर के गठनादि का अनुमान किया जा सकता है-
सूर्य शुष्क अग्नि तत्व
चंद्र जल जल तत्व
मंगल शुष्क अग्नि तत्व
बुध जल पृथ्वी तत्व
गुरू जल आकाश तत्व
शुक्र जल जल तत्व
शनि शुष्क वायु तत्व
2. केवल ग्रहों से अनुमान नहीं लगाना चाहिये। राशियों पर भी ध्यान देना होगा। जिस प्रकार हर ग्रह का अपना-अपना तत्व है उसी प्रकार हर राशि का भी तत्व है। मेष, सिंह और धनु अग्नि राशियाँ हैं, वृष, कन्या और मकर को पृथ्वी तत्व की राशियाँ कहा गया है। मिथुन, तुला और कुम्भ वायु राशियाँ तथा कर्क, वृश्चिक और मीन जल राशि कहलाती हैं।
जल राशि और जल ग्रह के आधिपत्य से मनुष्य के शरीर में मोटेपन की संभावना होगी। वायु, अग्नि और शुष्क ग्रह के मेल से शरीर में दुर्बलता की उत्पत्ति होती है। पृथ्वी राशि और पृथ्वी ग्रह के आधिपत्य से शरीर मजबूत होता है।
लग्न को तनु भाव भी कहते हैं। इससे मनुष्य के शरीर, वर्ण, आकृति का विचार किया जाता है। लग्न में कौन-सी राशि है, कौन-सा ग्रह स्थित है? तथा लग्न का स्वामी कुंडली में कहाँं और किस राशि में है? इन सब बातों का ध्यान पूर्वक विचार करने से मनुष्य के शरीर के गठनादि का अनुमान किया जा सकता है। लग्न निश्चय करने की यह बड़ी उपयोगी तथा सरल विधि है।
कई बार जातक के शरीर के गठनादि के अनुमान लगाने में कठिनाई आ सकती है। अतः सरलता से अनुमान करने के लिये नीचे दिये नियमों पर ध्यान देना होगा-
1. लग्न राशि कौन सी है और किस तत्व की है?
2. लग्न में यदि कोई ग्रह है तो वह कैसा है?
3. लग्नेश कौन ग्रह है और किस राशि में है?
4. लग्नेश के साथ कौन-सा ग्रह है?
5. लग्न पर कैसे ग्रह की दृष्टि है?
6. लग्नेश दुष्ट स्थानगत तो नहीं?
7. गुरू कहाँ है और कैसी राशि में है।
ऊपर दिये गये नियमों के साथ- साथ यदि लग्न राशि, लग्न स्थित ग्रह, लग्नेश और लग्नेश की राशि पर ध्यान दिया जाये, तो हम जातक के गठनादि के बारे में भली प्रकार कह सकते हैं।
नीचे दिये गये फलादेशानुसार फल कहना होगा – क्रं. लग्न में राशि लग्न में ग्रह लग्नेश की राशि फलादेश
कुण्डली सं.1,कुण्डली सं.2कुंडली नं0-1
इस कुंडली पर उपर्युक्त नियमानुसार फल इस प्रकार बनता है- प्रथम नियमानुसार मिथुन लग्न वायु राशि है। दूसरे नियमानुसार लग्न में दो ग्रह बैठे है। एक मंगल जो शुष्क ग्रह है और जिसका तत्व अग्नि है। दूसरा शुक्र जल ग्रह है और जिसका तत्व भी जल है। शुक्र अपने मित्र बुध की राशि में है तीसरे नियमानुसार बुध जल ग्रह एवं पृथ्वी तत्व का है और कर्क राशि में, जो जल राशि है, बैठा है। चौथे नियमानुसार लग्नेश बुध के साथ सूर्य शुष्क ग्रह एवं अग्नि तत्व का है। पंचम नियमानुसार शनि की पूर्णा दृष्टि लग्न पर है और शनि शुष्क ग्रह एवं वायु तत्व का है। छठे नियमानुसार दुष्ट स्थान में नहीं है। सप्तम नियमानुसार गुरू की पूर्ण दृष्टि लग्नेश बुध पर है और गुरू जल राशिगत है। इन सब बातों पर ध्यान देने से शरीर में जल तत्व की अधिकता प्रतीत होती है।
कुंडली नं0-2
इस कुंडली में लग्न राशि धनु अग्नि राशि है। लग्न में कोई ग्रह नहीं। लग्नेश गुरू जल ग्रह एवं आकाश तत्व का है और जल राशि में स्थित है। लग्नेश के साथ कोई ग्रह नहीं। मंगल और शनि लग्न को देख रहे हैं, दोनों शुष्क ग्रह हैं, मंगल अग्नि तत्व तथा शनि वायु तत्व ग्रह हैं, लग्नेश अष्टम स्थान गत है। ज्योतिष का एक नियम यह भी है कि यदि लग्नेश अष्टम या द्वादश भावगत हो तो शरीर दुबला-पतला होता है। इस कारण यह जातक दुबला पतला है।
कुण्डली नं0-3
यह कुंडली मशहूर फिल्म कलाकार श्री अशोक कुमार की है। इस कुंडली पर भी हम उपरोक्त नियम लागू कर सकते हैं। लग्न अग्नि राशि में है। लग्न में शनि जो शुष्क ग्रह है और वायु तत्व का है बैठा है। लग्नेश मंगल शुष्क ग्रह है एवं अग्नि तत्व का है। लग्नेश के साथ जलग्रह और जल तत्व का चंद्र उच्च राशि में है। गुरू जो एक जल ग्रह है लग्न को देख रहा है।
कुण्डली सं. 3
लग्नेश दुष्ट स्थानगत नहीं है। गुरू की पूर्णा दृष्टि लग्न पर है। इस कुंडली में अग्नि तत्व तो प्रधान है ही परन्तु जल तत्व भी है, इस कारण आप बहुत मोटे न होकर मजबूत शरीर के मालिक हैं। आप दृढ़ शरीर के व्यक्ति हैं।
इस प्रकार अभ्यास करने से हम कुंडली देख कर ही जातक के गठनादि का अनुमान कर सकते हैं।
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