
ज्योतिष शास्त्र में मंगल को सेनापति कहा गया है। शूरवीरता, साहस, हिम्मत, लड़ाई झगड़ा, धोखाधड़ी, चोरी, भाई, मित्र, चाचा, आदि की जानकारी मंगल से मिलती है। सूर्य तथा बृहस्पति मंगल के मित्र हैं और बुध तथा केतु मंगल के शत्रु। इसका रंग लाल है। मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन में मंगल शुभ तथा मिथुन, कन्या राशि में अशुभ फल दायी होता है। कुण्डली के आधार पर बारह घरों में मंगल का विभिन्न प्रभाव निम्नलिखित है।
(1) कुण्डली में पहले घर का मंगल जातक को शूरवीर, सत्यप्रिय तथा उच्च विचारां वाला बनाता है। बुराई के बदले भी भलाई करने को तत्पर रहता है। अच्छे स्वभाव को छोड़कर स्वयं दुखी हो जाता है। शुक्र, राहु, केतु की चीजें प्रयोग करने से मंगल बद हो जाता है।
उपाय– मंगल की शांति हेतु सूर्य व चन्द्रमा की चीजों से सहायता ली जा सकती है। मसूर की दाल या मीठा भोजन जमादार को दान करें।
(2) कुण्डली के दूसरे घर में बैठा मंगल जातक को मान-प्रतिष्ठा दिलाता है, क्योंकि यह बृहस्पति का पक्का घर है। वह एक नेक इन्सान होता है, शरणागत की रक्षा करता है तथा उनका भरण-पोषण करता है, ससुराल पक्ष से भी मदद मिलती है लेकिन मंगल बद होने की दशा में जातक परेशान हो जाता है।
उपाय- भाइयों की मदद लें, घर में मृगछाला रखें, बिजली का कारोबार करें, रेवड़ियाँ जल में प्रवाहित करें।
(3) कुण्डली के तीसरे घर में यदि मंगल है तो जातक का मंगल ही मंगल होता है क्योंकि तीसरा घर मंगल का पक्का घर है। यदि 9, 11 में बृहस्पति, सूर्य, बुध अथवा चन्द्र हो तो जातक की परेशानी बढ़ जाती है।
उपाय– सफेद रंग की चीज अपने पास रखें, चाँदी की अंगूठी बाएँ हाथ की उंगली में धारण करें। हाथी दाँत की बनी चीजें घर में रखना शुभ है।
(4) चौथे, घर का मंगल बिल्कुल शुभ नहीं होता। यहां मंगल बद होकर नुकसान ही करता है। यदि 3, 4, 8 में मंगल के शत्रु बैठे हों तो आग में घी का काम करता है और वह विनाशकारी बन जाता है।
उपाय– त्रिलोह की अंगूठी पहनें। 400 ग्राम चावल दूध से धोकर 14 दिन तक पवित्र नदी में प्रवाहित करें तथा चन्द्रमा का उपाय करें।
(5) पाँचवे घर का मंगल जातक को पराविद्याओं में पारंगत बनाता है। जातक तंत्र-मंत्र विद्या का ज्ञाता बनकर यश कमाता है। यदि मंगल बद हो तो वरबाद कर देता है।
उपाय– घर के आंगन में नीम का पेड़ लगाएँ। रात को सिरहाने पानी रखें, तथा सुबह स्वयं पी लें।
(6) छठे घर में यदि मंगल है तो शनि का विशेष कुप्रभाव पड़ता है। भाइयों को नुकसान पहुंचाता है तथा पुत्र की कमी हो जाती है।
उपाय– चाँदी या चावल का दान दें तथा कन्याओं की पूजा करें।
(7) सातवें घर के मंगल का जातक काफी उन्नति करता है, प्रभाव शाली व्यक्तित्व का स्वामी होता है। लेकिन यदि बुध साथ में हो तो बहन तथा बुआ को अच्छा फल नहीं देता।
उपाय– चाँदी की ठोस गोली हमेशा अपने पास रखें। बहन, बुआ, साली, मौसी को मिठाई खिलाएँ।
(8) आठवें घर का मंगल जातक के लिए मौत का फंदा साबित होता है। वह भाइयों के साथ हमेशा लड़ाई-झगड़े का माहौल बनाए रखता है। यह मंगल का अपना पक्का घर है इसलिए पहले तथा आठवें घर में गृहस्थ जीवन को सुखी रखता है।
उपाय– हाथी दाँत का घर में रखना या धारण करना लाभदायी होता है।
(9) यदि नवें घर मे मंगल है तो जातक का जीवन हराभरा तथा मंगलमय होता है। 13- 14 वर्ष की आयु में जातक के पिता को लाभ पहुँचता है तथा 28 वर्ष की आयु में जातक अच्छी ख्याति अर्जित कर लेता है। इस कुण्डली में सूर्य अच्छा फल देता है तथा जातक को धन कमाने का सुअवसर प्राप्त होता है।
उपाय– मंगलवार को हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाए,ँ बड़े भाई-भाभी की सेवा करें। लाल रूमाल का प्रयोग करे।
(10) दसवें घर का मंगल जातक को सर्वोत्तम फल देता है। यदि मंगल को कोई ग्रह न देख रहा हो तो जातक राजा के समान हो जाता है। यदि इसमें शुक्र निर्बल हो जाये तो 45 वर्ष की आयु तक संतान पर भारी रहता है। यदि दूसरे घर में क्रूर ग्रह राहु-केतु, शनि हों तो बुरा असर पड़ता है।
उपाय– सुन्दर काण्ड का अखण्डपाठ करें। हनुमान जी की उपासना करें। मीठा भोजन करें। उबलते दूध को जमीन पर न गिरने दें।
(11) यदि ग्यारहवें घर में मंगल है तो जातक कुशल व्यापारी साहसी तथा न्यायप्रिय होता है। जातक की सन्तानें झगड़ालू होती है। जातक का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। बुध अच्छा हो तो 28-42 वर्ष तक धन का आगमन होता रहता है।
उपाय– काला या सफेद कुत्ता पालना लाभकारी होता है
(12) बारहवें घर का मंगल जातक को काफी कष्ट देता है। यह राहु का पक्का घर है। यदि जातक की पत्नी मंगली न हो या उसके ग्रह मंगल के दोष को कम न कर रहे हां तो जातक की मृत्यु हो जाती है।
उपाय– सिर पर चोटी रखें। जल में गुड़ डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें।
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