गुरूजी के टोटके पुस्तक से

गुरूजी के टोटके पुस्तक से

गुरूजी के टोटके पुस्तक से-

  1. व्यापार में हानि होने परः-
    जिन व्यक्तियों को लगातार हानि हो रही हो, वे गायत्री मंत्र के द्वारा हवन करवाएं। व्यापार स्थल पर हवन कुन्ड की भभूती को, किसी सफेद रंग के कपड़े में डाल कर, घर में तथा व्यापार स्थल पर रखें। हानि होनी बंद हो जाएगी। व्यापार अच्छा चल जाएगा। परेशानी होने पर या सेहत खराब होने पर इस हवन कि भभूति का तिलक करें तथा जीभ से भी चाट लें, तो शारीरिक कष्ट तथा बीमारी हर हालत में ठीक हो जाएगी।
  2. व्यापार की उन्नति हेतुः-
    जिन व्यापारियों का व्यापार चलते-चलते ठप हो गया हो, लाख प्रयत्न करने के बाद भी नहीं चल रहा हो उसे किये-कराये काम, या व्यापार में बाधा होने कि शंका हो, तो इस उपाय को करें। प्रत्येक मंगलवार को 11 पीपल के पत्ते लें। उनको गंगा जल से अच्छी तरह धो कर लाल चन्दन से हर पत्ते पर सात बार राम-राम लिखें। इसके बाद हनुमान जी के मंदिर चढ़ा आएं तथा प्रसाद बांटे और इस मन्त्र का जाप, जितना कर सकते हैं, करे। मंत्र हैंः ‘जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करो गुरूदेव की नाई’। इस उपाय को सात मंगलवार लगातार करें। अगर हो सके तो इसे गुप्त रखें।
  3. व्यापार में वृद्धि तथा बरकत के लिएः-
    अगर आप यह अनुभव करते हैं, कि लाख प्रयत्न करने पर भी आपका व्यापार उन्नति नहीं करता तथा पैसे और घर में बरकत नहीं है, तो ऐसा करेंः बृहस्पतिवार को एक पीले रंग का रूमाल या कपड़ा लेकर मंदिर जाएं। तुलसी के आसपास जो घास उगी हो, उसे तोड़ कर पीले कपड़े या रूमाल में रख कर वापस घर लें आएं। इसको व्यापार स्थल तथा घर में रख दें। व्यापार में वृद्धि तथा धन की बरकत रहेगी। इस क्रिया को बृहस्पतिवार को ही करें।
  4. व्यापार एवं कारोबार के लिएः-
    अगर आपको किसी काम से जाना हो, तो एक नींबू ले कर उस पर चार लौंग गाड़ दें तथा इस मंत्र का जाप करें – ‘ओम श्री हनुमते नमः’ 21 बार जप करने के बाद उसको साथ लेकर चलें जायें। काम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
  5. व्यापार में वृद्धि तथा शांति के लिए :-
    एक पीपल का पत्ता शनिवार को तोड़ कर लायें। उसे गंगा जल से अच्छी से तरह धो कर उस पर 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ पढ़ें तथा उसको जेब में या कैश बॉक्स या गद्दी के नीचे रखें। यह पीपल के पत्ता हर शनिवार बदलें। व्यापार वृद्धि होगी और घर में सुख-शांति रहेगी।
  6. व्यापार में घाटा दूर करने के लिए :-
    व्यापार में घाटा हो रहा हो, या काम नहीं हो रहा हो, एक चुटकी में आटा लेकर रविवार के दिन व्यापार स्थल या दूकान के मुख्य द्वार के दोनों और थोड़ा-थोड़ा छिड़क दें साथ में कहें : जिसकी नजर लगी है उसको लग जाए। बुरी नजर वाले तेरा मुहँ काला। यह क्रिया या उपाय केवल शुक्ल पक्ष में ही करें। संभव हो तो प्रयत्न करें की इस क्रिया को कोई नहीं देखे। हो सके तो यह क्रिया गुप्त रखें।
  7. व्यापार में वृद्धि के लिएः-
    कई बार बहुत परिश्रम के बाद भी व्यापार में वृद्धि नहीं होती, तो इस उपाय को करें। शनिवार को एक पीपल का पत्ता ले कर गंगा जल से धो लें। अगर गंगा जल न हो, तो दूध से धो लें। आप जहां बैठते है, इस पत्ते को अपने पास रख ले। अगले शनिवार एक पत्ता और लाएं। फिर वैसा ही करें। जब सात शनिवार के बाद सात पत्ते हो जाएं, तो इन सातों पत्तों पर जय वीर हनुमान लिख कर नदी या नहर में प्रवाहित करें। इससे व्यापार में वृद्धि होती रहेगी।
  8. बिक्री की वृद्धि हेतुः-
    हमारा व्यापारी वर्ग आम तौर पर बिक्री घटने, या बिक्री पर रोक लगने से अधिक चिंतित रहता है, तो इसके लिए इस उपाय को करें। रविवार को गंगा जल ले कर, उस पर फूंक मार कर, 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करें। फिर इस जल को व्यापार स्थल पर और सभी दीवारों पर भी छिड़क दें। ऐसा लगातार सात रविवार करें। व्यापार में वृद्धि होगी। सोमवार को सफेद चंदन ले कर आएं। उसे एक सप्ताह तक घर के मंदिर में रखें, धूप बत्ती दिखाएं तथा एक सप्ताह के बाद उसको घर में पैसों के साथ रखें, तो बिक्री में वृद्धि और घर में खुशहाली होगी। अगर हो सके, तो सोमवार को इससे अपने माथे पर तिलक भी किया करें।
  9. व्यापार में वृद्धि तथा धन लाभ हेतु :-
    यह प्रयोग नवरात्रि की अष्टमी के दिन किया जाता है। लाल रंग का चौकोर कपड़ा लें। उसे देवी के चित्र/मूर्ति के सामने चौकी (पटरा) पर बिछा लें। उसमें 1 तोला साबुत चावल, लाल चंदन का टुकड़ा, लाल गुलाब के साबुत पुष्प, रोली तथा एक लघु नारियल रखें। फिर उस लाल कपड़े में सारा सामान लपेट कर, कपड़े की पोटली बना कर अपने गल्ले, अथवा अलमारी, या संदूक, जो भी आपके हिसाब से उपयुक्त स्थान हो, वहां रख दें। 6 माह बाद पुनः नवरात्रि की अष्टमी पर इस प्रयोग को दोहराएं।
  10. बिक्री हेतु जापः-
    थोड़े से काले मां (साबुत उड़द) ले कर उस पर निम्नलिखित मंत्र का जाप करें तथा दुकान में फैला दें। दुकान में बिक्री बढ़ जाएगी। इस मंत्र को 31 बार जपें। मंत्र इस प्रकार हैः भवर वीर तू चेला मेरा। खोल दुकान कहा करे मेरा उठे जो डंडी बिके जा माल-भवर सौ नहीं जाए। इस मंत्र का जाप पूर्व की तरफ मुख कर के करना है।
  11. व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो तोः-
    यदि किसी के व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा हो तो किसी भी बुधवार के दिन यह प्रयोग शुरू कर सकते हैं। यह प्रयोग कम से कम पाँच सप्ताह तक लगातार करना आवश्यक होता है। प्रयोग को प्रारम्भ करने वाले बुधवार को पीली कौड़ी लें, एक जोड़ा लोंग लें, एक जोड़ी छोटी इलायची तथा अपने व्यापार स्थल की एक चुटकी मिट्टी लें कर इन कौड़ियों को जला लें जो इन की राख बनेगी उस राख को एक पान के पत्ते में ताँबे का सिक्का ले जिस में एक छेद कर लें। इस सारी सामग्री को छेद वाले सिक्के के साथ किसी बहते
    हुए जल में प्रवाहित कर दें। जिस दिन सारी सामग्री को जल में प्रवाह करें उस दिन का उपवास रखें तथा किसी नौ वर्ष से छोटी कन्या को भोजन करायें।
  12. साझेदारी तथा व्यापार में उन्नति के लिएः-
    अगर साझेदारी हो और लड़ाई-झगड़े हों, तो ऐसा करें : किसी होली या दीपावली की रात को कच्चा सूत लेकर उसको रोली में रंग लें। उसको लक्ष्मी माता के आगे रख कर प्रार्थना करें, कि हमारा काम-काज ठीक चले तथा लड़ाई-झगड़े न हों। हमारी साझेदारी बनी रहे तथा व्यापार में उन्नति हो।
  13. व्यापार में सफलता के लिएः-
    व्यापारिक यात्रा या काम पर जाने से पहले ग्यारह रूपये किसी गुप्त जगह पर रख कर चलें जाएं। आपको हर हालत में सफलता प्राप्त होगी। वापिस आने पर इन गुप्त रूपयों को किसी गरीब को दान में दें।
  14. व्यापार स्थिर करने हेतुः-
    थोड़ा सा कच्चा सूत ले कर उसे शुद्ध केसर में रंग लें। इस रंगे हुए सूत को ग्यारह बार ‘श्री हनुमते नमः’ का पाठ कर के अभिमंत्रित कर लें। इसको व्यापारिक स्थल पर बांध दें। व्यापार आगे बढ़ने लगेगा। नौकरी से संबंधित व्यक्ति इसे अपनी दराज में रखें। तरक्की का योग बनने लगेगा तथा हर प्रकार की मनोकामना पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाएगी।

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