
मानव-जीवन में स्पप्नों का विशेष महत्व रहता है। स्वप्न देखने वाला प्रायः अपने द्वारा देखे गये स्वप्नों का शुभाशुभ फल जानने की प्रायः चेष्टा करता है। तथा (बड़े-बूढ़ों से) देखे गये स्वप्न के विषय में पूछता है। स्वप्नों के विषय में अनेकानेक पुस्तकें भी देखने को मिलती हैं। स्वप्न वास्तव में तभी स्वप्न माना जाता है जब स्वप्न निद्रावस्था में आये। स्वप्न पर कोई प्रतिबन्ध नही है। कि वह दिन ही मे ही आये या रात्रि में। स्वप्न जब चाहें तब आ सकते हैं। यह अनुसन्धान द्वारा सिद्ध हो चुका है कि स्वप्नों का भी फल होता है और स्वप्न देखने वालों को वास्तविक रूप से उनका अच्छा या बुरा फल अवश्य मिलता है। हमें कुछ ऐसे भी स्वप्न आते हैं, जो या तो शीघ्राति-शीघ्र फल देते हैं या विलम्ब से।
रात्रि के प्रथम-प्रहर में देखा गया स्वप्न साल भर के पश्चात् अपने फल को देता है। द्वितीय प्रहर में देखा स्वप्न आठ माह के बाद फल देता है। तृतीय प्रहर का देखा गया स्वप्न तीन माह के बाद फल देता है। चतुर्थ प्रहर का देखा गया स्वप्न महीने भर के बाद फल देता है। अरूणोदय काल में देखा गया स्वप्न दस दिन में अपना शुभाशुभ फल देता है। सूर्योदय काल में देखा गया स्वप्न तुरन्त ही अपना फल देता है।
नदी, समुद्र में तैरना, आकाश में चलना, घर का देखना, नक्षत्र, सूर्य और चन्द्र मण्डल का देखना, महल पर चढ़ना, छत पर चढ़ना, शराब का सेवन करना, सफेद कपड़ा पहनना, रत्न तथा आभूषणों को देखना, चर्बी तथा मांस का भक्षण करना, कीड़े तथा विष्ठा का शरीर में लेपन करना, रक्त से स्नान करना, तथा दही-भात का भोजन स्वप्न में करते दिखाई देने से कार्य की शीघ्र ही सिद्धि होती है। जो स्वप्न में देवता, ब्राह्मण, राजा, सुन्दर आभूषण, उत्तम स्त्री का दर्शन, बैल, हाथी, पर्वत, दूध तथा फल वाले पेड़ों पर चढ़ना, सीसा, मांस और माला की प्राप्ति होना, सफेद पुष्प और सफेद वस्त्रधारी पुरूष को देखने से धन की प्राप्ति होती है।
जो स्वप्न में राजा, हाथी, घोड़ा, सुवर्ण, बैल, या गौ को देखता है तो उसके कुटुम्ब की वृद्धि होती है।
जो बैल या वृक्ष पर चढ़कर ही जग जाता है। तो उसे धन मिलता है।
‘सफेद सर्प’ के दाहिनें हाथ में काटने से दस दिन के भीतर ही स्वप्न देखने वालों को निश्चित ही हजारों रूपये की प्राप्ति होती है।
जल में रहने पर बिच्छु या सर्प के काटने का स्वप्न देखने से धन, पुत्र और जय की प्राप्ति होती है।
कोठा, पर्वत पर चढ़ने पर और समुद्र में तैरने पर स्वप्न देखने वालें को राज्य की प्राप्ति होती है।
तालाब के बीच में कमलों के पतों पर घी और खीर का भोजन करते हुये दिखाई पड़ने पर भी राज्य मिलता है।
बालिका, मुर्गी तथा कुकरी को स्वप्न में देखने पर स्त्री की प्राप्ति होती है।
हथकड़ी के लगने या बंधने से ओर रस्सियों में बंधे हुए स्वप्न में दिखाई पड़ने से पुत्र तथा धनादि की प्राप्ति होती है।
आसन, पलंग, सवारी, शरीर, वाहन और घर इनको स्वप्न में जलते हुए देखकर स्वप्न देखने वाला यदि हड़बड़ा कर जाग जाये तो स्वप्न देखने वालों को सब तरफ से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
सूर्यमण्डल तथा धनुमण्डली को स्वप्न में देखने पर रोगी का रोग नष्ट होता है, और यदि निरोगी ऐसे स्वप्न को देखता है तो उसे अवश्य ही धन का लाभ होता है।
मदिरा तथा रक्तपान स्वप्न में देखने से ब्राह्मण को तो विद्या का लाभ होता है और सेवक को धन का लाभ होता है।
सफेद-वस्त्र तथ गन्ध धारण करने वाली सौभाग्यवती स्त्री से स्वप्नावस्था में आलिंगन करने पर सम्पति की प्राप्ति होती है।
छाता, खड़ाऊँ, जूता तथा तलवार यदि स्वप्न में प्राप्त होता हो, तो धन की प्राप्ति होती है।
बैल से युक्त रथ पर चढ़ना यदि स्वप्न में दिखाई पड़े तो अवश्य ही धन प्राप्त होता है।
स्वप्न में दही देखने पर विद्या ज्ञान की प्राप्ति होती है। दही तथा दुध और घी की प्राप्ति हो तो यश प्राप्त होता है।
घृत (घी) का भक्षण यदि स्वप्न में होता हुआ नजर आये तो घर में क्लेश पैदा होता है।
स्वप्न देखने वाला यदि अपने को आंतों मे लिपटा हुआ स्वतः देखे तो राज्य की और सुयश की प्राप्ति होती है। स्वप्न में यदि मनुष्य के पैर के मांस का भक्षण होते हुए देखने से धन लाभ होता है। बाहु के मांस का स्वप्न में भक्षण देखने पर अपार धन का लाभ होता है। सिर के मांस का भक्षण होते हुए स्वप्न में देखने पर राज्य की प्राप्ति या महान धन की प्राप्ति होती है। स्वप्न में यदि फेनयुक्त दुध का दान करता हुआ स्वप्न देखने वाला नजर आये तो उसे सोमदान का फल मिलता है। उपरोक्त कथन विद्वानों का है।
स्वप्न में गेहुँ देखने से धन का लाभ होता है। यज्ञ को स्वप्नावस्था में देखने से यज्ञ होता है। सफेद सरसों को स्वप्न में देखने से विविध लाभ होते हैं।
नागपत्र की प्राप्ति होने से, घर में स्वप्नावस्था में कपूर का आना, चन्दन तथा पाण्डुवर्ण का पुप्प स्वप्न में प्राप्त होने से सब तरफ से लक्ष्मी की प्राप्ति का शुभ सूचक है।
रूई, भस्म, भात और मट्ठी इनको छोड़कर अन्य सभी सफेद वस्तुयें यदि स्वप्न में दिखाई पड़ें तो स्वप्न देखने वालें को सुन्दर फल मिलता है।
गौ, हाथी, देवता तथा घोड़ा इनको छोड़कर सभी काली वस्तु यदि स्वप्न में दिखाई दे तो अशुभ है। शरीर में तेल मर्दन कर ऊँट, सर्प या हिंसक पशु, गधा, सुअर या भैंस पर दक्षिण दिशा की तरफ जाना। लाल वस्त्र पहनी हुई काली, हँसती हुई, खुले बाल वाली, नाचती हुई स्त्री, दक्षिण दिशा की तरफ पुरूष को घसीटे। या जिसे चाण्डाल आदि अन्त्यज दक्षिण दिशा की तरफ घसीटे या मरे हुए आदमी या सन्यासी जिसका आलिंगन स्वप्न में करते दिखाई दें। जिसे स्वप्न में वमन या दस्त हों, जिसकें दांत टूट जायें और जो मनुष्य सेमर, ढाक, धूप, सांप, की बांबी, नीम का पेड़, फुलों से लदा हुआ कचनार का पेड़ देखे या जो स्वप्न में चिता पर बैठे। जो रूई, तेल, खली, लोह, नमक और तिल प्राप्त कर पकवान भक्षण करे या मदिरा पान स्वप्नावस्था में करता हुआ नजर आये तो उसे विभिन्न प्रकार के रोगों की प्राप्ति होती है। और मृत्यु को प्राप्त होता है।
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