सदगुरू की महिमा
- 09-10-2026
- By : TeamS - Astrologer.Click
अनेक जन्मों के संस्कार जब अभिव्यक्त होकर इस अवस्था में आते हैं कि उन पर भगवत्कृपा हो सके तब मनुष्य के अनतःकरण में यह लालसा पैदा होती है कि मुझे अपने परम लक्ष्य परमात्मा {…}
Read Moreअनेक जन्मों के संस्कार जब अभिव्यक्त होकर इस अवस्था में आते हैं कि उन पर भगवत्कृपा हो सके तब मनुष्य के अनतःकरण में यह लालसा पैदा होती है कि मुझे अपने परम लक्ष्य परमात्मा {…}
Read Moreअश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि। इन आठों चिरंजीवीयों की जो मनुष्य प्रातःकाल श्रद्धापूर्वक स्तुति करता है, वह सब रोगों से मुक्त होकर सुखपूर्वक सौ वर्ष की आयु को प्राप्त {…}
Read Moreचौरासी लाख योनियों में से सिवा मनुष्य के किसी को भी अपने जीवन के उद्देश्य का पता नहीं है। मनुष्य और पशु समान रूप से आहार, निद्रा, भय और मैथुन में प्रवृत्त होते हैं। {…}
Read Moreया निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी। यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्चतो मुनेः।।भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि- ‘जो सब भूतप्राणियों के लिये रात्रि है, संयमी पुरुष उसमें जागता है, और सब भूतप्राणी जिसमें {…}
Read Moreनिष्काम साधना, भक्ति साधना और योग साधना की तरह एक और साधना है- ज्ञान की साधना! इस ज्ञान की साधना की पद्धति श्रुति इस प्रकार बतलाती है- आत्मज्ञान का दर्शन करना चाहिये। दर्शन करने {…}
Read Moreवैदिक काल से लेकर आज तक सनातन मत परम सत्ता की माता और पिता के रूप में उपासना करता आया है। सनातन मार्ग हमें यह भी सिखाता है कि इन दो भावों में से {…}
Read Moreभगवान् श्रीराम सम्पूर्ण विश्व के लिये महान् आदर्श हैं और भक्तों के लिये तो वे सर्वस्व ही हैं। मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान् श्रीराम के अत्यन्त प्रिय हैं- पवनपुत्र श्रीहनुमान्जी। ये अपने प्राणाराध्य के बिना एक क्षण {…}
Read Moreश्रीहनुमानजी की उपासना से सम्बन्धित एक अचूक प्रयोग लेख रूप में लिपिबद्ध किया जा रहा है। आशा है, पाठक गण श्रद्धा-विश्वास पूर्वक इससे अवश्य लाभ उठायेंगे- प्रयोग विधि-किसी भी परोपकार-भावना या उचित एवं योग्य {…}
Read Moreकर्मयोगी का अर्थ है कर्म करते समय जो ऐसी भावना रखता है कि कर्म करने वाला, कर्म कराने वाला, कर्म और कर्म फल यह सब प्रभु है अर्थात् मुझ में प्रभु हैं, प्रभु का {…}
Read Moreसनत्कुमारजी हनुमान भक्तों के लिये कहते हैं- मैं हनुमानजी के लिये रहस्य सहित दीपदान विधि का वर्णन करता हूँ, जिसका ज्ञान लेने मात्र से साधक सिद्ध हो जाता है। दीपपात्र का प्रमाण, तैल का {…}
Read More