Tag: Fourth House in Astrology

सुख-दुःख का आईना है जन्म-कुण्डली का चतुर्थ भाव

सुहृद् गृह ग्राम चतुष्पदानां श्रेत्रोद्यमालोकनकं चतुर्थे।‘जातकाभरमण्’ का मत है कि मित्र, बन्धु, पशु और कृषि कर्म का विचार चतुर्थ भाव से करना चाहिये। ‘भावकुतूहलम्’ ग्रन्थ के अनुसार-सुखपतिः सुखगस्तनुनाथं युग जन यति प्रवरालमगिंनाम्। त्रिकगतोविरीतमिहादिभिः सुख {…}

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