
इन दिनों भारत के छोटे-बड़े कस्बे से लेकर महानगरों के शॉपिंग मॉल फेंगशुई के आट्रिकल से भरे पड़े हैं। आज हर वर्ग का व्यक्ति फेंगशुई के टोटकों से अपनी किस्मत को चमकाने के लिये इन्हें आजमाने में लगा हैं। चीन के कुटीर उद्योगो में बनाये जाने वाले इन आर्टिकल्स पर खुद चीन के लोग इतना विश्वास नहीं करते जितना आज भारत के लोग इन पर करते हैं। फेंगशुई के जानकार एवं दुकानदार इनकी मनगढ़ग अतिरंजित विशेषतायें समझाकर सामान्य कीमत की वस्तु को कई गुना मंहगे दामों में बेचते हैं और खूब मुनाफा कमाते हैं।भारत में फेंगशुई के विभिन्न आर्टिकल्स जैसे लॉफिगं बुद्धा, विंडचाईम, क्रिस्टल, कछुआ, मुंह में सिक्का दबाये तीन टांग का मेंढ़क, बतख का जोड़ा, एज्यूकेशन टॉवर, लाल धागे में बंधे तीन सिक्के इत्यादि बहुत अधिक प्रसिद्ध हैं। विक्रेता इन्हें बेचते समय इनकी बढ़ा-चढाकर तारीफ इस प्रकार करते हैं जैसे लॉफिंग बुद्धा के बारे में कहते हैं कि यह अपने भरी भरकम पेट में परिवार के सारे दुःखों को उदरस्त कर लेगें, बतख का जोड़ा दाम्पत्य जीवन को बिखरने नहीं देगा, सुनहरी मछलियाँ धन का आगमन करेंगी। ऐसा माना जाता है कि मरीज के कमरे में कछुआ रखने से मरीज की आयु बढ़ती है। विंडचाईम घर में लगाने से किस्मत में चार चांद लग जाएंगे, पढ़ाई की टेबल पर एज्यूकेशन टॉवर रखने से बच्चे अच्छे नम्बर से पास होंगे, लाल धागे में बंधे तीन सिक्के रखने से घर की तिजौरी कभी खाली नहीं होगी इत्यादिं लोग इन्हें अपने घर के लिये खरीदते हैं और साथ ही इन्हें गिफ्ट के रूप में देने का प्रचलन भी खूब चल रहा है। लोग इन्हें आजमाने में भी संकोच नहीं करते। कई लोग यह सोचकर ही खरीद लेते हैं कि इससे लाभ हुआ तो ठीक है वरना यह घर की शोभा ही बढ़ाएंगे।
हम भारतीय में वास्तुदोष दूर करने और सुख समृद्धि के साथ अच्छे रहन-सहन की आकांक्षा रखते हुये फेंगशुई के इन आर्टिकल्स का उपयोग बिना इनकी सत्यता और उपयोगिता जाने बिना टोटकों के रूप में कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि महत्त्वपूर्ण वास्तुदोषों में इन आर्टिकल्स की कोई उपयोगिता नहीं है। चीनी वास्तुशास्त्र फेंग शुई में दों पद्धतियों का प्रयोग होता है। एक कम्पास पद्धति, जिसमें चाइनीज कंपास लियोपान ;स्नव चंदद्ध का प्रयोग किया जाता है। जिसमें किसी भी व्यक्ति की जन्म तिथि के आधार पर उस व्यक्ति का कुआं नम्बर निकाला जाता है और कुआं नम्बर के आधार पर शुभ-अशुभ दिशाओं का निर्धारण कर मकान में बेड़रूम, ड्राईगरूम, किचन, टॅायलेट बाथरूम, दरवाजे, खिड़कियों इत्यादि का निर्माण किया जाता है चमत्कारी वर्ग पर आधारित दूसरी पद्धति पा-कुआ ;च्।.ज्ञन्।द्ध होती है, जिसमें हर वास्तु को आठ भागों में बांटा जाता है।, जो भवन के मुख्य द्वार या कमरे के द्वार पर आधारित होती है। इस पद्धति में जहाँ द्वार होता है, वहाँ दिशा हमेशा उत्तर दिशा मानी जाती है। इस पा-कुआ ;च्।.ज्ञन्।द्ध पद्धति में किसी भी प्रकार के कंपास का उपयोग नहीं होता है। सामान्य समस्याओं में इस पद्धति में सरलता से उपयोग कर लाभ प्राप्त किया जाता है। विषय की अज्ञानता एंव उपयोग में सरलता के कारण आजकल भारत में यही पद्धति लोकप्रिय हो रही हैं। यह सभी आर्टिकल पा-कुआ पद्धति के आधार पर उपयोग में लाये जा रहे हैं। फेंगशुई की लियो-पान कंपास पर आाधारित पद्धति भारतीय वास्तुशास्त्र की पद्धति के समान है। इन दोनों को हम इस प्रकार समझ सकते हैं कि जिस तरह बीमारी में स्वास्थ्य लाभ के लिये एक पद्धति होम्योपैथी है तो दूसरी एलोपैथी। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिस प्रकार एलोपैथी से उत्कृष्ट हैं इसी प्रकार भारतीय वास्तुशास्त्र भी फेंगशुई से ज्यादा परिष्कृत है। फेंगशुई में व्यक्ति विशेष की जन्म तिथी पर कुआं नम्बर निकालकर उसके घर का मुख्यद्वार एवं कमरे का द्वार लगाया जाता है। फर्नीचर स्थापित किया जाता है। पर आदि उसका उपयोग कोई दूसरा व्यक्ति करना चाहे तो वह उसके लिये बिल्कुल अनुकूल नहीं होगा। इसके विपरित भारतीय वास्तुशास्त्र में जो निर्माण कार्य किया जाता है वह किसी व्यक्ति विशेष के आधार पर नहीं होता। वास्तुशास्त्रानुसार बने भवन का कोई भी व्यक्ति बिना कोई परिवर्तन किये उपयोग कर सकता है चाहे वह दादा हो या पोता, औरत हो या आदमी, नौकर हो या मालिक, मकान मालिक हो या किरायेदार इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
फेंगशुई की पा-कुआ पर आधारित दूसरी पद्धति हमारे भारतीय मांगलिक चिन्हों की तरह है। परंतु यहां भी हमारी भारतीय पद्धति इससे कहीं ज्यादा सटीक एवं समृद्धशाली है। ध्यान रहे डिसीज और डिसएबिलिटी में बड़ा अंतर होता है। डिसीज (बीमारी) दवाईयों के द्वारा ठीक की जा सकती है। परन्तु फिजिकल डिसएबिलिटी (शारीरिक विकलांगता) नहीं। फिजिकल डिसएबिलिटी ठीक करने के लिये ऑपरेशन ही करने पड़ते हैं। उसी प्रकार महत्वपूर्ण वास्तुदोष डिसएबिलिटी की केटिगीरी में ही आते हैं जिन्हें बिना तोड़फोड़ के दूर करना असंभव होता है और साधारण वास्तुदोष डिसएबिलिटी की केटिगीरी में ही आते हैं। इन दोषों से उत्पन्न होने वाली नकारत्मक ऊर्जा को यह आर्टिकल समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करते हैं।
फेंगशुई की उत्पत्ति चीन में हुई है। फेंगशुई के ज्यादातर आर्टिकल्स सिम्बॉलिक हैं। जैसे विद्या के लिये एज्युकेशन टॉवर है, पैसे के लिये लॉफिंग बुद्धा के सिर पर रखी हुई पोटली है, लम्बी उम्र के लिये कछुआ इत्यादि है। हमारी भारतीय संस्कृति बहुत ही समृद्ध है। हमारे यहाँ बुद्धि के लिये गणेशजी हैं, गणेशजी का मंत्र पढने से एवं स्मरण करने से विद्या लाभ मिलता है। धन के लिए धन की देवी लक्ष्मी हैं, जिसकी पूजा करने से धन प्राप्ति होती है, तिजारी में लक्ष्मी एवं गणेशजी की छाप वाला चांदी का सिक्का रखने से तिजोरी में बरकत बनी रहती है, भय दूर करने के लिये हनुमान जी हैं। हनुमान चालीसा पढ़ने से या हनुमान जी का ताबीज धारण करने से भय दूर होता है। हमारे यहाँ पति की लम्बी आयु के लिये सावित्री पूर्णिमा का व्रत रखकर वटवृक्ष की पूजा अर्चना की जाती है क्योंकि वटवृक्ष की आयु 200 से 300 वर्ष मानी गई है। फेंगशुई में नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने के लिये विंडचाईम लगाने की सलाह दी जाती है तो हमारे यहाँ भी पूजा आरती करते समय घंटी एवं ताली बजाई जाती है। फेंगश्ई में मुख्यद्वार पर सकारात्म्क ऊर्जा बढ़ाने के लिये दरवाजे पर फूलों का गुलदस्ता, इत्यादि लगाने की सलाह देते हैं। और हमारे यहाँ मुख्यद्वार पर ओम्, स्वास्तिक, शुभ लाभ इत्यादि बनाने व लिखने की एवं वंदरवान लगाने की परंपरा है, इससे एक कदम आगे हमारे यहाँ मुख्यद्वार के आगे रंगोली बनाने की भी परंपरा है। जो भरपूर मात्रा में सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करती है।
फेंगशुई के जितने भी आर्टिकल आज भारत में बिक रहे हैं उनमें से ज्यादातर चीन के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्था के प्रतीक हैं । इन प्रतीकों का उपयोग किस लिये किया जा रहा है यह चीन के निवासी अच्छी तरह से जानते हैं क्योंकि उन्हें अपनी संस्कृति एवं धर्म के बारे मे सही जानकारी होती है। जबकि इसके विपरीत हम भारतीय उनके प्रतीकों के महत्व को नहीं जानते। हम हमारे भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का अर्थ अच्छी तरह से समझते हैं। हम अपने प्रतीक चिन्हों का उपयोग करते समय यह भी समझते हैं कि उनसे हमें क्या लाभ होगा और यह समझा हुआ अर्थ ही हमारे विश्वास और आस्था को बढ़ाता है ओैर इस बढ़ी हुई आस्था और विश्वास के बल पर हम अपने कार्य क्षेत्र में अत्यधिक उत्साह और उमंग के साथ कार्य करते हैं और उचित शुभ परिणाम प्राप्त करते हैं।
Tags: FengShui, remedies, spiritual, vastu, vastu remedies, Vastu Shastra